जी हाँ आज प्रकृति यही सवाल हर एक मनुष्य से कर रही है....तुम्हारे लिए कौन महत्वपूर्ण है मैं या तुम्हारा स्वार्थ ? इस धरती में रहने वाला हर इन्सान इस प्रकृति से होने वाले अत्याचार के प्रति जिम्मेदार है करने वाला भी और चुप रहने वाला भी। देखिये इस धरती के सबसे बुद्धिमान कहे जाने वाले मनुष्य की करतूत......
इन चित्रों को शब्दों की जरूरत नहीं! प्रकृति अपने दर्द को शब्दों में बयां नहीं कर सकती उसे समझने के लिए भावनात्मक हृदय चाहिए .........